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Saturday, January 9, 2010

आधी दुनिया पर वैचारिक चिंतन

-डॉ. अशोक प्रियरंजन
स्त्री विमर्श पर विविध आयामों और दृष्टिकोणों से चिंतन की कड़ी में सुधा सिंह ने भी आधी दुनिया के दुख, सुख, समस्याओं और त्रासद स्थितियों को सार्थक और प्रभावशाली रूप से अभिव्यक्त किया है। नारी चिंतन को उन्होंने व्यक्तिगत, राष्ट्रीय और सामाजिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करके विचारों को बहुआयामी बनाया है। उनके विचार सामान्य महिला के लिए भी उतने ही सार्थक हैं जितने किसी उच्च वर्ग की साधन संपन्न महिला के लिए। नारी अंतर्मन की पीड़ा को पुरातन और आधुनिक संदर्भों से जोड़कर उन्होंने व्यापक रूप में रेखांकित किया है। नारी शिक्षा का महत्व, भ्रूण हत्या : एक अपराध, स्वावलंबी कैसे बनें, स्वास्थ्य की देखभाल, रिश्तों का महत्व समझें, बच्चों का पालन-पोषण और विकास, समय प्रबंधन कैसे करें, बढ़ती उम्र और देखभाल तथा अस्मिता पर प्रहार शीर्षक से नौ अध्यायों में विभक्त इस पुस्तक में उन्होंने नारी जीवन के गौरव, अस्मिता, विडंबना, त्रासदी, त्याग और आधुनिक समाज में बदलती भूमिका को रेखांकित किया है। विषय को छोटे-छोटे उपशीर्षकों में विभक्त करके उसे अधिक संप्रेषणीय, सरल और प्रवाहमय बना दिया है। सरल, सुबोध भाषा में गंभीर विषयों को अभिव्यक्त करके सुधा सिंह ने पुस्तक की पठनीयता को विस्तार दे दिया है। नारी की स्थिति को लेकर उपजी उनकी चिंता जहां कई समसामायिक प्रश्नों को उठाती है, वहीं उनके समाधान के लिए भी वैचारिक विश्लेषण करती है। यही बात पुस्तक को उपयोगी बना देती है।

नारी समस्या और समाधान, लेखिका : डॉ. सुधा सिंह , प्रकाशक : हरबंस लाल एंड संस, नई दिल्ली, मूल्य : 200 रुपये।

(अमर उजाला, मेरठ 0 8 जनवरी 2010 केअंक में प्रकाशित)