Friday, December 18, 2009

रामचरितमानस के शैली पक्ष का अनुशीलन

-अशोक प्रियरंजन
महाकवि गोस्वामी तुलसी दास द्वारा रचित महाकाव्य रामचरितमानस समस्त हिंदुओं की आस्था का केंद्र रहा है। इसकी चौपाइयों के व्यापक अर्थ हैं और इनमें अद्भुत जीवन दर्शन समाहित है। इसीलिए भारतीय जनमानस को रामचरित मानस ने बहुत गहराई से प्रभावित किया है। इसकेविविध प्रसंग जनमानस को जीवन के कर्मक्षेत्र में आगे बढऩे लिए मार्गदर्शन करते हैं। डॉ. आशुतोष मिश्र की पुस्तक रामचरितमानस का शैली वैज्ञानिक अध्ययन में इस महाकाव्य के विविध पक्षों का शोधपरक अनुशीलन किया गया है। यह पुस्तक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें रामचरितमानस की भाषिक संवेदना का समग्र विश्लेषण किया गया है। इस महाकाव्य में प्रयुक्त शैलियों, भावव्यक्ति की प्रबलता के लिए प्रयुक्त प्रतीक और बिंब विधान का सोदाहरण विवेचन किया गया है। इसकेसाथ ही शब्द विधान, पद चयन और अर्थ योजना को भी रेखांकित किया गया है। भाषिक नियमों को छोड़कर महाकवि ने नवीन मार्ग का जो अनुकरण किया है, उसकी महत्ता को भी पुस्तक में विवेचित किया गया है। मानस में समान या विरोधी भाषिक इकाइयों की आवृत्ति का समानांतर प्रयोग किया गया है। इससे भाषिक वैशिष्ट्य और शैलीय गरिमा का प्रस्फुटन हुआ है। महाकवि तुलसीदास के रामचरितमानस मानस में अभिव्यक्त विïिïवध भावों के निहितार्थों को बहुआयामी दृष्टिकोण से ग्रहण करने में यह पुस्तक अपनी अलग अर्थवत्ता और महत्ता रखती है। रामचरितमानस के अध्येयताओं के लिए यह सर्वाधिक उपयोगी पुस्तक है।

रामचरितमानस : शैली वैज्ञानिक अध्ययन, लेखक : डॉ. आशुतोष मिश्र, प्रकाशक : निर्मल पब्लिकेशंस, नई दिल्ली, मूल्य : ३०० रुपये।

2 comments:

Arvind Mishra said...

पुस्तक परिचय के लिए आभार !

अशोक मधुप said...

धन्यवाद